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18 July 2020

Disclaimer:- किसी भी व्यक्ति, स्थान से समानता मात्र एक संजोग है, अगर इस कहानी से आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी है।



Note:- if you are new here, please read the previous part.



Previous part:- शिवा लालू को बताता है की “रूही मुझे अपने बचपन का दोस्त समझ कर मेरे से बात कर रही थी जो असल में मैं नहीं रवि था।"

लालू:- फिर ये सुनने के बाद रूही उससे बोलती है की “लेकिन सामने वाले घर में तो शिवा रहता है।" इस पर रवि उसे बताता है की वो पहले हमारे ही साथ रहता था। इसके बाद रूही मेरे को देखती है और मैं देखता हूँ की उसकी आँखों में आँसू आने लगे है। उसकी आँखों में भरे हुए आँसुओं से मैं उसके गुस्से का अंदाज़ा लगा लेता हूँ। वो बस चुपचाप जतिन का हाथ पकड़कर उसे वापस घर की तरफ ले जाती है और मैं उसे अपनी सफाई तक में कुछ भी नही बोल पता। बस चुपचाप उसे जाते हुए खड़ा देखता रहता हूँ। फिर ये सब देखकर रवि मेरे से पूछता है की “ये इसको क्या हुआ?" मैं उसको सारी बात शुरू से end तक बताता हूँ फिर वो मुझे दिलासा देता है की सब ठीक हो जाएगा उसको थोड़ा समय दो, इसके बाद वो भी वहाँ से चला जाता है। मैं ये सब जो हुआ उसके बारे में सोचते हुए अपने घर आ जाता हूँ। उस रात मुझे बिल्कुल भी नींद नहीं आयी थी। अगले दिन जैसे ही शाम होती है मैं हिम्मत करके अपनी छत पर जाता हूँ ताकि उससे बात कर सकूँ लेकिन वो छत पर नहीं आती है। बहुत दिन बीत जाते है लेकिन वो छत पर नहीं आती है और ना जतिन ही छत पर आता है। अब लगभग छुट्टियां खत्म ही हो चुकी थी आख़िरी कुछ दिन ही बचे थे। मैं बहुत सोच विचार करने के बाद रस्तोगी अंकल के gate पर दस्तक देता हूँ। अंकल दरवाज़ा खोलते है मैं उनसे जतिन के बारे मैं पूछता हूँ। वो बताते है की “जतिन अंदर कमरे है तुम वहीं जाकर उससे मिल लो।" मैं अंदर जाकर देखता हूँ वो और रूही एक साथ कमरे में बैठ कर खेल रहे थे। जतिन मुझे देखकर खुश हो जाता है पर रूही उदास हो जाती है। मैं रूही के पास जाकर उससे बोलता हूँ की “एक बार मेरी बात सुन लो, मैंने ये सब कुछ जान कर नहीं किया है, मुझे बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था की वो बचपन वाला तुम्हारा दोस्त कोई और होगा, हाँ ये बात मैं मानता हूँ की जब भी तुम बचपन की कोई भी बात बताती थी तो मैं झूठे को उसमे हाँ में हाँ मिला देता था क्योकि मुझे ये लगता था की शायद मैं भूल गया हूँ वो सभी बातें, पर मेरा भरोसा करो मैंने तुमको जानबुझ कर तकलीफ नही दी है। वो सब अनजाने में create हुए confusion की वजह से हुआ था।" इस पर रूही अपना गुस्सा निकालते हुए बोलती है की “मैं कैसे मान लूँ इस बात को, की ये सब अनजाने में हुआ है। तुमने सोचा क्या मेरी क्या situation रही होगी जब मुझे पता लगा की तुम वो लड़के नहीं हो जो मेरे बचपन का दोस्त था, मैं बहुत बड़ी बेवकूफ हूँ इसिलए तुम मेरे से झूठ बोलकर मुझे धोखा देते रहे। मुझे तुम्हारी कोई बात ही नहीं सुननी तुम चले जाओ यहाँ से please।" मैं फिर चुपचाप वहां से चला जाता हूँ। दो दिन बाद जतिन शाम को मेरे घर आता है और मेरे से icecreme खाने चलने को कहता है पर मैं उस समय काफी disturbe था, इसीलिए उसके साथ चलने से मन कर देता हूँ। अगले दिन ही रूही अपनी मम्मी के साथ वापस अपने घर चली जाती है। फिर अभी कुछ दिन पहले ही तू मुझे बताता है की सामने कोई लड़की आयी है। मैं चाहता था तुझे बता दूँ पर फिर ये सोचा की तू हँसी भी उड़ाएगा और हो सकता है गुस्सा भी हो जाए की मैंने ये बात तुझे पहले क्यों नही बताई। यही सब सोच कर ही मैं शांत रहा था तब।

लालू:- ये क्या खिचड़ी सी पक गयी है तेरी life में, और एक बार बता कर तो देखता यार कुछ न कुछ solution सोचते हम दोनो मिलकर।

शिवा:- उस वक्त दिमाग में कुछ आ ही नहीं रहा था यार और तू भी उसको पसन्द करने लगा था तो मैं समझ ही नहीं पाया की तुझे कैसे बताऊँ ये सब! 

लालू:- फिर आगे क्या हुआ, मतलब तू जब उस दिन शाम को मुझे मेरे घर छोड़ कर वापस वहां गया था तब आगे क्या बातें हुई, उसने क्या कहा तेरे से?

शिवा:- हाँ तो तुझे तेरे घर छोड़ कर जब मैं रूही के पास जाता हूँ तो वो पूछती है की, “तुम मुझे ignore क्यों कर रहे हो।" मैं उसको बताता हूँ की “भले ही वो सब अनजाने में हुआ था लेकिन हुआ तो था। बस इसी वजह से मेरी हिम्मत नही हो पायी की मैं तुम्हारे सामने भी आऊँ इसीलिए मैं तुम्हारे सामने नहीं आ रहा था।" फिर वो मुझसे पूछती है की “तुम मेरे बुलाने पर उस दिन बाहर क्यों नही आए थे?” मैं उससे पूछता हूँ की “तुमने मुझे कब बुलाया?" तब वो बताती है की “जब मैं last year वापस जाने वाली थी तब मैंने तुम्हारे यहाँ जतिन को भेजा था ताकि जाने से पहले तुमसे बात कर सकूँ, पर तुम आये ही नहीं।" फिर मैं अपनी किस्मत पर हँसता हूँ। वो मुझे हँसता हुआ देख कर मेरे हँसने की वजह पूछती है।

लालू:- हाँ तो तूने क्या बोला??

शिवा:- तो मैं उसे बताता हूँ की “मैं ये सोचकर नही आया था की अगर तुमने मुझे देखा तो कहीं तुम्हारा mood और खराब ना हो जाए। वो बोलती है की “अरे तब तक मेरा गुस्सा भी खत्म हो गया था तब मैंने पूरे ध्यान से सोचा था वो सब और फिर मुझे लगा की तुम nature से वैसे लड़के नहीं हो इसीलिए तुमसे बात करने और sorry बोलने के लिए तुमको बुलाया था।" फिर मैं उससे कहता हूँ की “कोई बात नहीं हम जब अगली बार icecream खाने जाए तब इत्मिनान से बोल लेना।" 

लालू:- इसका मतलब तू कल उसके साथ बाहर गया था घूमने और icecream खाने।

शिवा:-  नहीं यार तेरे को पता तो है किस्मत, कितनी अच्छी है मेरी। मैं दो दिन रवि के घर गया उसे पढ़ाने, फिर आज का दिन तेरे को कहानी बताते हुए गया। अब बस कल का इंतज़ार है।

लालू:- सब ठीक होगा भाई तू tension न ले।

फिर अगले दिन शिवा, रूही से मिलकर घर आता है जहाँ पर लालू पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा होता है। 

लालू:- क्या हुआ उसने क्या कहा जल्दी बता!!

शिवा:- उसने पहले sorry बोला और फिर हम लोग normaly बातें करने लगे। उसने बताया की उसे बुरा लगा की वो जाने से पहले मेरे से नहीं मिल पायी थी, पूरे साल वो इन छुट्टियों का ही इंतज़ार करती रही। 

लालू:- फिर आगे।

शिवा:- मैंने बोल दिया की मैं उसे पसन्द करता हूँ।

लालू:- उसने क्या बोला।

शिवा:- वो शर्मा कर पहले ज़मीन की तरफ देखती रही और फिर नज़रें उठा कर मुझे देखते हुए बोली की “इसका जवाब आपको बाद में मिल जाएगा और वैसे भी अभी तो छुटियाँ बस शुरू ही हुई है।" इतना बोलने के बाद वो मुस्कुराते हुए वहाँ से चली जाती है। 

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Harsh Gaur


                                                    Mradul Agrawal