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29 June 2020

Disclaimer:- किसी भी व्यक्ति, स्थान से समानता मात्र एक संजोग है, अगर इस कहानी से आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी है।


Note:- if you are new here, please read the previous part.


Previous part:- शिवा पहले से ही जानता था कि उस लड़की का नाम रूही है, इस बात से लालू को shock लगता है।

लालू:- तुझे उसका नाम कैसे पता?

शिवा:- अरे यार, मम्मी, पापा को बता रही थी इसीलिए पता है, मैं कोई अंतर्यामी थोड़े ही हूँ।

लालू:- भाई यार अगर तू बता देता मुझे तो तेरा क्या बिगड़ जाता। यहाँ मैं उसका नाम पता लगाने के लिए पता नहीं क्या क्या जुगाड़ बैठा रहा था।

शिवा:- यार मुझे भी कल ही पता चला। मम्मी रस्तोगी अंकल जी के यहां गयी थी कुछ काम से तब उन्होंने पूछा होगा उनसे की "ये लड़की कौन है," यही बात वो पापा को बता रही थी, मैन तभी सुन लिया था।

लालू:- अच्छा चल भाई कोई नहीं, मैं अब चलता हूँ।

ये बोलकर लालू अपने घर के लिए चला जाता है। अगले दिन जब लालू शिवा की छत पर पतंग उड़ा रहा था तभी उसका पैर मुड़ जाता है और वो जोर से चिल्लाते हुए गिर पड़ता है। उसकी आवाज़ सुन कर शिवा भागता हुआ छत पर जाता है।

शिवा:- क्या हुआ, ऐसे लेटा हुआ क्यों है तू?

लालू:- ऐसे मुझे अच्छा लगता है इसीलिए लेटा हूँ, अबे यार लग गयी है पैर में मोच आगयी है मेरे और तू मज़ाक कर ले पहले।

शिवा:- अरे यार, ठीक है चल नीचे चलते है पहले।

लालू:- ठीक है भाई

तभी लालू पीछे मुड़ कर देखता है तो रूही उन दोनो को हँसते हुए देख रही थी। तभी जतिन शिवा को आवाज़ देकर छत पर वापस आने के लिए बोलता है। शिवा लालू को उसके घर तक छोड़ कर आ जाता है। दो दिन तक लालू अपने घर पर ही आराम करता रहा और सोचता रहा की क्या शिवा उस दिन दुबारा छत पर गया होगा या नहीं! फिर तीसरे दिन जब वो थोड़ा ठीक महसूस करता है तो शिवा के घर जाता है। वो देखता है की शिवा वहाँ पर नहीं है उसकी मम्मी ने बताया की "वो थोड़ी देर पहले ही बिना बताये कहीं चला गया है" फिर शिवा की मम्मी उससे शिवा का इंतज़ार करने के लिए कहती है। लालू शिवा की मम्मी से बोलता है की "मैं छत पर जा रहा हूँ आप शिवा को भी वहीं पर ही भेज दीजिएगा" फिर लालू छत पर चला जाता है।

वो छत पर जाने के बाद रस्तोगी अंकल की छत पर देखता है पर वहाँ भी कोई नही था। वो पूरी शाम छत पर इंतज़ार करता रहता है पर नाही शिवा आता है और नाही रूही छत पर आती है। वो अपने घर जा ही रहा था की रास्ते में उसको  शिवा मिल जाता है। वो गुस्से में शिवा से पूछता है की

लालू:- कहाँ था भाई? मेरे चोट लगी थी कम से कम एक बार तो देखने आ जाता यार घर, आज पूरी शाम तेरे घर पर इंतज़ार कर रहा था मैं तेरा और तेरा कोई अता-पता ही नहीं है।

शिवा:- यार दो दिनों से रवि के घर जा रहा हूँ उसको कुछ chapter पढने थे जो उसकी समझ में नहीं आ रहे थे।

(रवि शिवा का cousin brother है जो शिवा के घर से थोड़ी दूरी पर ही रहता है)

लालू:- तू उसको मना कर देता यार, वैसे भी कौन सा exams है उसके।

शिवा:- यार तुझे पता तो है की मेरे से ऐसे मना नही होती।

तभी लालू देखता है की जिस तरफ से शिवा आया था उसी तरफ से रूही और जतिन भी आ रहे थे। उसको शिवा पर शक होता है। 

लालू:- तू रूही और जतिन के साथ बाहर गया था ना!

शिवा:- चोट तेरे पैर में लगी है या दिमाग में! उल्टी बातें क्यों कर रहा है? मैं रवि के ही घर था यार चल मेरे साथ और खुद ही पूछ ले रवि से।

लालू:- अच्छा चल ठीक है अब टाइम हो गया है मैं अब घर चलता हूँ, और हाँ कल घर पर ही मिल जाना भइया।

फिर शिवा अपने घर की तरफ चला जाता है और लालू को अब भी शिवा पर शक था इसीलिए वो रवि के घर चला जाता है सच्चाई का पता लगाने। रवि उसको बताता है की शिवा यहाँ आ रहा है उसको पढाने के लिए, ये सुनकर लालू शर्मिंदा होता है की वो अपने ही दोस्त पर शक कर रहा था। अगले दिन जब लालू शिवा के घर जा रहा होता है वहाँ पर पहले से ही रवि बैठा होता है। 

शिवा:- यार तू मेरे पर इतना शक क्यों करने लगा है? वो तो तेरी वजह से आज मैंने घर पर ही रवि को पढाने के लिए बुला लिया था इसीलिए मुझे पता लगा की तू कल इसके घर गया था।

लालू:- (झुंझलाहट में) क्योंकि जब से वो आयी है तूने छत पर जाना बन्द कर दिया है, जतिन के साथ तू घंटो खेला करता था पर अब बिल्कुल भी नहीं और नाही तूने मुझे ये बताया की मेरे को जब तू घर छोड़कर आया था तब तेरी रूही से कोई बात हुई या नहीं। बस तेरा ये सब बर्ताव देखकर मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है।

शिवा:- (रवि की तरफ देखते हुए) तू अभी घर जा मैं तेरे को बाद में पढा दूँगा।

रवि वहाँ से चला जाता है।

शिवा:- तेरे को घर छोड़कर जब में वापस छत पर गया तब रस्तोगी अंकल की छत पर सिर्फ रूही अकेली थी। मैंने उससे पूछा की जतिन कहाँ है?, उसने बताया वो नीचे जा चुका है। मैं भी फिर जब नीचे उतरने लगा तब उसने मुझे रोका और मेरे से पूछा की जबसे वो आयी है तभी से मैं उसको ignore क्यों कर रहा हूँ?

लालू यहीं पर शिवा को बीच में टोक देता है और बोलता है की

लालू:- तू उसे ignore कर रहा है मतलब मैं कुछ ठीक से समझ नहीं।

शिवा:- लंबी कहानी है शुरू से शुरू करता हूँ तू बैठ आराम से।

To be continued.......
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Harsh Gaur


                                                    Mradul Agrawal