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27 June 2020

Disclaimer:- किसी भी व्यक्ति, स्थान से समानता मात्र एक संजोग है, अगर इस कहानी से आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी है।

ये कहानी शुरू होती है 1996 की summer vacations से, दो दोस्त लालू और शिवा, दोनों ही बचपन से पक्के दोस्त है और दोनों ने ही इस साल 11th के exams दिए है। 

लालू, अपने दोस्त शिवा के घर जा रहा था। शिवा के घर के सामने, रस्तोगी अंकल जी के घर के बाहर एक car आकर रुकी। लालू को लगा कि शायद कोई रिश्तेदार आए है, पर वो बिना ताकझांक किये शिवा के घर मे अंदर जाने लगा, तभी पीछे से रस्तोगी अंकल ने लालू को आवाज़ लगाई,

रस्तोगी जी:- लालू बेटा ज़रा सुनो इधर आओ।

लालू जैसे ही पीछे मुड़ता है वो देखता है कि एक लड़की मासूम सी मुस्कुराहट और बड़ी बड़ी गहरी काली आँखों से उसे देख रही है। वो एक पल को ठहर सा जाता है। रस्तोगी अंकल दुबारा लालू को आवाज़ देते है,

रस्तोगी जी:- अरे लालू सुनो, कहाँ ध्यान है तुम्हारा मैं कुछ बोल रहा हूँ।

लालू:- sorry अंकल जी मुझे लगा आप किसी और से बोल रहे है, बोलिये क्या हुआ।

रस्तोगी जी:- बेटा ज़रा ये समान अंदर रखवाने में मदद कर दो!

लालू:- जी बिल्कुल अंकल जी।

लालू वैसे तो किसी की भी मदद इतनी आसानी से नहीं करता था, पर शायद इस बार उस लड़की के बारे में जानने की उत्सुकता थी जिस वजह से वो इस काम के लिए तैयार हो गया। उस लड़की के साथ आई हुई lady, रस्तोगी अंकल को पापा बोल रही थी और वो लड़की उनको नाना। लालू समझ गया की ये लड़की अपने नाना जी के यहाँ गर्मी की छुट्टी बिताने आयी है।

लालू फटाफट शिवा के घर जाकर उसको ये सब बताता है। शिवा काफी शांत और सीधे स्वभाव का लड़का है, और इसके उलट लालू काफी मदमस्त और शैतान स्वभाव का था।

अब लालू का शिवा के घर आना आम बात हो गयी थी। वो अब अक्सर शिवा की छत पर जाकर बैठ जाया करता था क्योंकि वो लड़की भी रस्तोगी अंकल के grandson जतिन के साथ छत पर खेलने आया करती थी। जतिन अभी सिर्फ 5 साल का ही था, उसकी और शिवा की काफी बनती थी। वो शिवा के साथ खूब खेलता था। लालू शिवा से छत पर चलने के लिए बोलता रहता था पर शिवा पता नही क्यों छत पर जाने से मना करता रहता था। एक दिन लालू छत से नीचे आकर शिवा से बोलता है कि,

लालू:- यार ये लड़की कितनी प्यारी है। मैं उसे बहुत पसंद करने लगा हूँ।

शिवा:- अच्छा, ये बता तू उसे पसन्द क्यों करता है?

लालू:- भाई वो बहुत cute सी है यार।

शिवा:- बस इसीलिए!

लालू:- यार उसे जब पहली बार देखा था ना बस देखता ही रह गया था, love at first sight के बारे में सुना है तूने कभी? अरे मैं तो भूल ही गया की तु तो बचपन से single है।

शिवा:- यार love at first sight जैसा कुछ भी नही होता है, सब फिल्मी चोंचले है भाई असल जिंदगी से इसका कोई नाता नहीं होता है।

लालू:- तू रहने दे यार, मेरे को और भटका रहा है। अगर तूने एक बार उसे देख होता तो तू ये नही बोल रहा होता मेरे से।

शिवा:- मतलब तू मजनू बन गया है पूरा अब।

लालू:- उड़ा ले मज़ाक बेटा तू, पर प्यार मेरा सच्चा है।

शिवा:- चल देखते है कितने दिनों तक तेरा ये सच्चा प्यार रहता है।

लालू:- देख लियो, अरे एक बात बता यार जबसे वो लड़की रहने आयी है तब से तू छत पर क्यों नही आता?

शिवा:- ऐसे ही यार मन नहीं किया मेरा।

लालू:- पहले तो तू जतिन के साथ भी खूब खेला करता था पर अब तू बिल्कुल ही नही जाता यार ऐसा क्यों?

शिवा:- अरे बोला तो बस मन नही करता यार, वरना चला जाता।

लालू को ये बात कुछ अटपटी सी लगी। उसे पता था कि शिवा को पतंगें उड़ाना बेहद पसंद है, इसीलिए वो सोचता है कि "क्यों न आज पतंगबाजी के बहाने शिवा को छत पर लेकर जाया जाए, फिर जतिन शिवा से बात करने ज़रूर आएगा और हो सकता है इसी बहाने मेरी भी उस लड़की से कुछ बात हो जाये।

लालू:- यार मैं सोच रहा था की क्यों न आज पतंग उड़ाई जाए काफी time हो गया है हम लोगों को पतंग उड़ाए हुए।

शिवा:- यार तू उड़ा लियो, मेरा अब पतंग उड़ाने का मन नही करता।

लालू:- तू ठीक तो है भाई!

शिवा:- मेरे को क्या होगा में ठीक हूँ।

लालू:- ठीक है भाई जैसा तुझे ठीक लगे।

उस दिन लालू छत पर पतंग उड़ाने के लिए  चला जाता है। कुछ देर पतंग उड़ाने के बाद लालू देखता है कि वो लड़की लालू की पतंग को बहुत ध्यान से देख रही है। इस वजह से लालू के अचानक ध्यान बट जाता है और उसकी पतंग कट जाती है। जतिन और वो लड़की ये देख कर हसने लगते है, तभी रस्तोगी अंकल नीचे से आवाज़ देते है, "रूही" बेटा, जतिन को लेकर नीचे आने ज़रा। इसके बाद वो दोनों नीचे चले जाते है। लालू भी तुरंत शिवा के पास जाता है और उससे बताता है कि,

लालू:- ओए आज मुझे उस लड़की का नाम पता चला है यार।

शिवा:- किसका नाम? रूही का!

लालू अचंभे से शिवा को देखता है और बोलता है

लालू:- तुझे उसका नाम कैसे पता बे,,,,,,,?

To be continued.....

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Harsh Gaur


                                                    Mradul Agrawal